काल एवं वाच्य
काल क्रिया के होने का समय बताता है और इसके तीन भेद हैं। भूतकाल बीते हुए समय का बोध कराता है (राम ने खाया) तथा इसके उपभेद हैं — सामान्य भूत (वह आया), आसन्न भूत (वह आया है), पूर्ण भूत (वह आया था), अपूर्ण भूत (वह आ रहा था), संदिग्ध भूत (वह आया होगा) और हेतुहेतुमद् भूत (यदि वह आता तो...)। वर्तमानकाल वर्तमान समय का बोध कराता है (राम खाता है) — उपभेद: सामान्य वर्तमान (वह पढ़ता है), अपूर्ण/तात्कालिक वर्तमान (वह पढ़ रहा है), संदिग्ध वर्तमान (वह पढ़ता होगा)। भविष्यत्काल आने वाले समय का बोध कराता है (राम खाएगा) — उपभेद: सामान्य भविष्यत् (वह जाएगा), संभाव्य/संदिग्ध भविष्यत् (शायद वह जाए)। वाच्य क्रिया का वह रूप है जिससे ज्ञात होता है कि वाक्य में कर्ता, कर्म या भाव में से किसकी प्रधानता है। तीन वाच्य हैं — कर्तृवाच्य में कर्ता प्रधान होता है और क्रिया कर्ता के अनुसार चलती है (राम पत्र लिखता है); कर्मवाच्य में कर्म प्रधान होता है और क्रिया कर्म के अनुसार चलती है, प्रायः "द्वारा" लगता है (राम के द्वारा पत्र लिखा जाता है); भाववाच्य में न कर्ता न कर्म, केवल भाव अर्थात क्रिया-व्यापार प्रधान होता है और यह प्रायः अकर्मक क्रिया तथा निषेधार्थक/असमर्थता-सूचक वाक्यों में आता है (मुझसे चला नहीं जाता, रोगी से उठा नहीं जाता)।
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Key Concepts — Quick Reference
शब्द-भेद एक नज़र में (रटें)
| संज्ञा | किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, भाव का नाम — भेद: जातिवाचक, व्यक्तिवाचक, भाववाचक |
|---|---|
| सर्वनाम | संज्ञा के बदले आने वाला शब्द — मैं, तुम, वह, यह, कोई, जो आदि (6 भेद) |
| विशेषण | संज्ञा/सर्वनाम की विशेषता बताने वाला शब्द — गुणवाचक, संख्यावाचक, परिमाणवाचक, सार्वनामिक |
| क्रिया | किसी कार्य के होने या करने का बोध — सकर्मक (कर्म सहित) व अकर्मक (कर्म रहित) |
शब्द-रचना एवं वाक्य-रचना
| संधि | दो वर्णों के मेल से विकार — विद्या + आलय = विद्यालय (स्वर/व्यंजन/विसर्ग) |
|---|---|
| समास | दो या अधिक पदों का मेल — राजपुत्र = राजा का पुत्र (तत्पुरुष, द्वंद्व, द्विगु, बहुव्रीहि, कर्मधारय, अव्ययीभाव) |
| उपसर्ग | शब्द के आगे जुड़कर अर्थ बदलने वाला अंश — प्र + हार = प्रहार |
| प्रत्यय | शब्द के अंत में जुड़कर नया शब्द बनाने वाला अंश — पढ़ + आई = पढ़ाई |