संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण एवं क्रिया
संज्ञा किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, गुण या भाव के नाम को कहते हैं। इसके तीन मुख्य भेद हैं — जातिवाचक संज्ञा किसी पूरी जाति या वर्ग का बोध कराती है (लड़का, नदी, पर्वत), व्यक्तिवाचक संज्ञा किसी विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु का बोध कराती है (राम, गंगा, हिमालय, दिल्ली), और भाववाचक संज्ञा किसी गुण, भाव, दशा या क्रिया-व्यापार का बोध कराती है (मिठास, बचपन, ईमानदारी, थकावट)। सर्वनाम वे शब्द हैं जो संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होते हैं; इसके छह भेद हैं — पुरुषवाचक (मैं, तुम, वह), निश्चयवाचक (यह, वह), अनिश्चयवाचक (कोई, कुछ), संबंधवाचक (जो, सो), प्रश्नवाचक (कौन, क्या) और निजवाचक (स्वयं, अपने आप)। विशेषण संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है; मुख्य भेद — गुणवाचक (अच्छा, लाल, लंबा), संख्यावाचक (दो, पहला, कुछ), परिमाणवाचक (थोड़ा, सारा, चार किलो) और सार्वनामिक विशेषण (यह लड़का, वह घर)। जिस शब्द की विशेषता बताई जाती है उसे विशेष्य कहते हैं। क्रिया किसी कार्य के होने या करने का बोध कराती है; जिस क्रिया का फल कर्म पर पड़े और जो कर्म की अपेक्षा रखे वह सकर्मक है (राम ने पत्र लिखा — "पत्र" कर्म), और जिसका फल कर्ता पर ही पड़े तथा कर्म की आवश्यकता न हो वह अकर्मक है (राम हँसा, बच्चा सोया)।
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Key Concepts — Quick Reference
शब्द-भेद एक नज़र में (रटें)
| संज्ञा | किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, भाव का नाम — भेद: जातिवाचक, व्यक्तिवाचक, भाववाचक |
|---|---|
| सर्वनाम | संज्ञा के बदले आने वाला शब्द — मैं, तुम, वह, यह, कोई, जो आदि (6 भेद) |
| विशेषण | संज्ञा/सर्वनाम की विशेषता बताने वाला शब्द — गुणवाचक, संख्यावाचक, परिमाणवाचक, सार्वनामिक |
| क्रिया | किसी कार्य के होने या करने का बोध — सकर्मक (कर्म सहित) व अकर्मक (कर्म रहित) |
शब्द-रचना एवं वाक्य-रचना
| संधि | दो वर्णों के मेल से विकार — विद्या + आलय = विद्यालय (स्वर/व्यंजन/विसर्ग) |
|---|---|
| समास | दो या अधिक पदों का मेल — राजपुत्र = राजा का पुत्र (तत्पुरुष, द्वंद्व, द्विगु, बहुव्रीहि, कर्मधारय, अव्ययीभाव) |
| उपसर्ग | शब्द के आगे जुड़कर अर्थ बदलने वाला अंश — प्र + हार = प्रहार |
| प्रत्यय | शब्द के अंत में जुड़कर नया शब्द बनाने वाला अंश — पढ़ + आई = पढ़ाई |